सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

समी पूजन

Displaying shamfcbooki.jpgदशेरा  तो राम का विजय  हुआ था. ज्यादातर लोगो को यही पता है. पर ईश दिन समय पूजन का  महत्व है।आज  शुभ मुर्हूत में समी नामक वृक्ष की पूजा की जाती है। किसी यात्रा या विजय के लिए सदा पुरे साल सफलता  मिले इसी लिए समय पूजन बाद उसके मूल की मिटटी या पान/डाली घर में लेकर घर में रखनी चाहिये । जिसे सुख- संपत्ति की वृद्धि होती है। कल्याण एवं आनंद वृद्धि होती है। 

गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

जैन नवग्रह मन्त्रविचार


जैन नवग्रह मन्त्रविचार 




पद्मप्रभु देवस्य: मन्त्र: (सूर्य मन्त्र :)
पद्मप्रभजिनेन्द्रस्य ,नामोच्चारेण भास्कर  |  
शांति  तुष्टिं  च पुष्टि  चं , रक्षा करुं  जयश्रियम्  

चन्द्रप्रभु  देवस्य: मन्त्र: (चन्द्र मंत्र)
चन्द्रप्रभजिनेन्द्रस्य , नाम्ना  तारा गणाधिप:
प्रसन्नो भव शांति च, रक्षां कुरु जयश्रीयम् । 

वासुपूज्य  देवस्य: मंत्र: (मंगल मंत्र:)
सर्वदा वासुपूज्यस्य , नाम्ना शांति जयश्रियम् । 
रक्षां कुरु धरासुनो ! अशुभोअपि  शुभो भव ॥ 

विमलनाथ देवस्य: मंत्र: (बुध मन्त्र:)
विमलातन्नधर्मारा : शांति: कुंथुरनमिस्तथा । 
महविरश्च तमन्ना, शुभोभव सदा बुध!

ऋषभदेवस्य: मंत्र:(गुरु मंत्र)
ऋषभजित सुपार्श्व शचभिनन्दनशीतलेो,
सुमति: संभव: स्वामी,श्रेयांसश्च जिनोत्तमा :॥ (१ )
ऐतततीर्थकृता  नाम्ना, पूज्य च शुभो भव,
शान्तिं  तुष्टिम च पुष्ठि  च कुरु देवगणार्चित ॥ (२)

सुविधिनाथ देवस्य: मंत्र: (शुक्र मंत्र)
पुष्पदन्त जिनेन्द्रस्य, नाम्ना दैत्यगणार्चित !
प्रसन्नो भव शांति च,रक्षां कुरु जयश्रीयम् ।

मुनिसुव्रत देवस्य: मंत्र: (शनि मंत्र)
श्री सुव्रत जिनेन्द्रस्य,नाम्ना सूर्यांगसम्भव !
प्रसन्नो भव शांति च,रक्षां कुरु जयश्रीयम् ।

नेमिनाथ देवस्य: मंत्र:(राहु मंत्र)
श्री नेमिनाथ तीर्थेश  ! नाम्नात्वं सिंहिकासुत !
प्रसन्नो भव शांति च,रक्षां कुरु जयश्रीयम् ।

मल्लिकनाथ  देवस्य: मंत्र: (केतु मंत्र)
राहो: सप्तमराशिस्थ:,करणे द्रश्यतेम्बरे ,
श्री मल्लिपार्श्वयोनाम्ना, केतो शांति श्रियं कुरु ॥












गुरुवार, 1 अक्टूबर 2015

मंत्र :


दुर्गा  मंत्र :                                                                 दत्तात्रेय मंत्र :
ॐ  हीं  द्रुं  दुर्गायै  नम: |                                             ॐ द्रां  दत्तात्रेयाय नम:|

शिव गायत्री  मंत्र :                                                      गायत्री  मंत्र :
ॐ महादेवाय  विद्महे  रुद्रमुर्तये  धीमहि|                   ॐ  भूर्भव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं  भर्गो  देवस्य |
तन्नो  शिव: प्रचोदयात् ||                                           धीमहि धियो  यो न: प्रचोदयात् ||

लक्ष्मी गायत्री मंत्र :                                                    राधिका  गायत्री  मंत्र :       
ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि |             ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि |
तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ||                                            तन्नो राधिका प्रचोदयात् ||

रुद्र गायत्री मंत्र:                                                          गणेश गायत्री मंत्र:
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि |                   ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुडाय धीमहि |          
तन्नो रुद्र: प्रचोदयात् |                                               तन्नो गणेश: प्रचोदयात् |

हनुमान  गायत्री मंत्र :                                               राम  गायत्री  मंत्र :
ॐ अंजनि जाय  विद्महे  वायुपुत्राय  धीमहि|              ॐ दशरथये  विदमहे  सितवल्लभ  धीमहि |
तन्नो  हनुमान: प्रचोदयात् ||                                      तन्नो राम: प्रचोदयात् ||

शनिवार, 23 अगस्त 2014

षष्ठिदेवी स्तोत्र

षष्ठिदेवी स्तोत्र

जगन्मात र्जगध्दात्रि  जगदानन्दकारिणी
प्रसिध्ध मम कल्याणि नमस्ते ष ष्ठिदेवते ||
रूपं देहि  यशो देहि भद्रं  भगवति देहि मे |
पुत्रान देहि धनं देहि सर्वा कर्म श्च देहि मे ||

आयु:प्रद महाभाग सोमवंस स्मुभ्दव |
महातापो निधिश्रेष्ठ मार्कण्डेय नमो स्तुते ॥
चिरंजीवो यथा त्वं भो भविष्यामि  तथा मुने ।
रूपवान वित्तवानायु: श्रिययुक्तश्चः सर्वदा ॥
 मार्कण्डेय नमस्ते स्तु सप्तकालपात जीवन ।
आयुरारोग्यसिध्दर्थ प्रसिद भगवन्मुने ॥
जीवो यथा त्वं भो मुनिनां  प्रवरो व्दिज ।
कुरुष्व मुनिशार्दुल तथा मां  चिरंजीविनम् ॥

जमदग्ने महाभाग महतेजोमयोज्वल ।
आयुरारोग्यसिध्दर्थमस्माकं  वरदो भव ॥
त्रेलोक्ये यानि भूतानि स्थावरणि चराणी  च। 
ब्रह्मविष्णुशिवै: सार्ध रक्षाम् कुर्वन्तु तानी मे॥ 
प्रीयन्तां देवता: सर्वा: पूजाम गृहयन्तु ता मम । 
प्रयच्छन्तवायुरारोग्यं  यश: सौख्यं च संपद: ॥  
मंत्रन्यूनं  क्रियान्यूनं द्रव्यन्यूनं  महामुने । 
यदर्चितं मयादेव परिपुर्ण  तथास्तु मे ॥